The MP Anatomy(Cheer phaad) Adhiniyam 1954
The Act sets rules for unclaimed dead bodies, including reporting, custody, disposal, and penalties, and allows rules for claims and preservation.
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- India
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Provisions of The MP Anatomy(Cheer phaad) Adhiniyam 1954
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The MP Anatomy(Cheer phaad) Adhiniyam 1954
The Act sets rules for unclaimed dead bodies, including reporting, custody, disposal, and penalties, and allows rules for claims and preservation.
मध्य प्रदशे ऐनेटामी (चीर-फाड़) अधधधनयम , 1954 [1954 का क्रमाांक 16] धिषय-सूची धारा प्रारधभभक 1. सांधिप्त नाम, धिस्तार और प्रारभभ 2. पररभाषाएँ 3. लािाररस शरीर के धिषय में सांशय अथिा धििाद राज्य शासन द्वारा धनयुक्त अधधकारी को सौंपा जायेगा 4. राज्य शासन की धारा 5 के अन्तगगत कायग करने हते ु अधधकाररयों को प्राधधकृत करने की शधक्त 5. लािाररस शरीर चीड़-फाड़ परीिण हते ु प्रयुक्त होंगे 6. दण्ड 7. लािाररस शरीर का कब्जा प्राप्त करने में सहायता करने हते ु पुधलस और अन्य अधधकारी का कर्त्गव्य 8.अधधधनयम के अन्तगगत कायग करने िाले व्यधक्त का बचाि 9.अधधकारी लोक सेिक होंगे 10.धनयम [राज्यपाल की स्िीकृधत 12 अप्रैल , 1954 को प्राप्त हुई, स्िीकृधत का प्रथम प्रकाशन मध्य प्रदशे राजपत्र में 23 अप्रैल ,1954 को हुआ] 1 मृत व्यधक्तयों के लािाररस शरीर धचककत्सालयों और आयुर्विज्ञान एिां धशिण सांस्थाओं को चीर-फाड़ धिश्लेजषण के अधभप्राय से आपूर्वत का प्रािधान करने हते ु अधधधनयम प्रारधभभक - जबकक मृत व्यधक्तयों के लािाररस शरीर धचककत्सालयों और आयुर्विज्ञान एिां धशिण सांस्थाओं को चीरफाड़ धिश्ल्ोोरष णके अधभप्राय से आपूर्वत का प्रािधान करना सामधयक है: यह एतद् द्वारा धनम्नरधलधखत में अधधधनयधमत ककया जाये : 1. सांधिप्त नाम, धिस्तार और प्रारभभ- (1) यह अधधधनयम मध्य प्रदशे ऐनेटामी (चीर-फाड़) अधधधनयम 1954 कहलायेगा। (2) इसका धिस्तार िेत्र सभपूणग मध्य प्रदशे होगा। (3) यह मध्य प्रदशे के ऐसे समस्त िेत्रों में प्रभािशील रहगे ा धजनमें िह मध्य प्रदशे धिधधयों का धिस्तारण अधधधनयम , 1958 (1958 का क्रमाांक 23) के प्रारभभ के तुरन्त पूिग प्रभािशील था और ऐसे अन्य िेत्रों में और ऐसे कदनाांक को प्रभािशील होगा जो राज्य शासन राजपत्र में अधधसूचना द्वारा धनदधे शत करे। 2. पररभाषायें - इस अधधधनयम में, जब तक धिषय अथिा सन्दभग में अन्यथा अपेधित न हो- (अ) “स्िीकृत सांस्था” से तात्पयग है राज्य शासन द्वारा चीर-फाड़ परीिण और धिश्लेहषण करने हते ु स्िीकृत कोई धचककत्सालय अथिा आयुर्विज्ञान अथिा धशिण सांस्था; (आ) “प्राधधकृत अधधकारी ” से तात्पयग है ऐसा अधधकारी जो इस अधधधनयम के अन्तगगत प्राधधकृत अधधकारी के कायो का धनष्पादन करने हते ु राज्य शासन द्वारा प्राधधकृत ककया जाये; (इ) “धिधहत ” से तात्पयग है इस अधधधनयम के अन्तगगत बनाये गये धनयमों द्वारा धिधहत ; (ई) “लािाररस शरीर ” से तात्पयग है ककसी मृत व्यधक्त का शरीर लािाररस धजसके धलये उसके धनकट सभबधन्धयों में से कोई अथिा उसकी जाधत, समुदाय और धमग का कोई व्यधक्त, ऐसी अिधध में जो धिधहत की जाये दािा न करे। 3 लािाररस शरीर के धिषय से सांशय अथिा धििाद राज्य शासन द्वारा धनयुधक्त अधधकारी को सौंपा जायेगा – यकद कोई सांशय अथिा धििाद उत्पन्न होता है कक ककसी मृत व्यधक्त का शरीर लािाररस शरीर है, तो मामला राज्य शासन द्वारा इस हते ु ककसी िेत्र के धलए अधधसूचना द्वारा धनयुक्त ऐसे अधधकारी को सौंपा जायेगा और ऐसे अधधकारी का धनणगय अधन्तम और धनणागयक होगा। 4. राज्य शासन की धारा 5 के अन्तगगत कायग करने हते ु अधधकाररयों को प्राधधकृत करने की शधक्त- राज्य शासन अधधसूचना द्वारा ककसी िेत्र हते ु अथिा उसके ककसी भाग हते ु, धजसमें यह अधधधनयम लागू 2 होता है, एक अथिा अधधक अधधकाररयों को प्राधधकृत कर सकता है धजनको धारा 5 के अन्तगगत ररपोटग की जायेगी और जो उक्त धारा के अन्तगगत कायग करने हते ु सिम होंगे। 5. लािररस शरीर चीर-फाड़ परीिण हते ु प्रयुक्त होंगे- (1) यकद कोई व्यधक्त राज्य शासन द्वारा अथिा ककसी स्थानीय प्राधधकरण द्वारा स्थाधपत अथिा सांचाधलत ककसी धचककत्सालय में धचककत्सा के अन्तगगत है और िह ऐसे धचककत्सालय में मृत हो जाता है और उसका शरीर लािाररस है तो ऐसे धचककत्सालय के पदासीन प्राधधकारी न्यूनतम व्यािहाररक धिलभब करके इस तथ्य की ररपोटग प्राधधकृत अधधकारी को दगें े और ऐसा अधधकारी तब उस लािाररस शरीर को चीरफाड़ परीिण और धिश्लेकषण के अधभप्राय से ककसी स्िीकृत सांस्था के पदासीन प्राधधकाररयों को सौंप दगे ा। (2) यकद कोई व्यधक्त उपधारा (1) में उधललधखत ककसी धचककत्सालय में अथिा बन्दीगृह में मृत हो जाये और उसका शरीर लािाररस है तो ऐसे धचककत्सालय अथिा बन्दीगृह के पदासीन अधधकारी न्यूनतम व्यािहाररक धिलभब करके इस तथ्य की ररपोटग प्राधधकृत अधधकारी को दगें े और उक्त अधधकारी लािाररस शरीर की उपधारा (1) में धिधहत अधभप्राय हते ु ककसी स्िीकृत सांस्था के पदासीन प्राधधकाररयों को सौंप दगे ा। (3) जहाँ कोई व्यधक्त ककसी िेत्र का स्थाई धनिासी न हो जहाँ उसकी मृत्यु हुई हो ऐसे िेत्र के लोक स्थान में मृत हो जाये और उसका शरीर लािाररस हो तो प्राधधकृत अधधकारी शरीर का कब्जा लेगा और उपधारा (1) में धनर्ददष्ट प्रािधानों के धलये मान्य की गई सांस्था के प्राधधकाररयों को सौंप दगे ा। 6. दण्ड- जो कोई भी इस अधधधनयम द्वारा आज्ञाधपत रूप के धसिाय ककसी लािाररस शरीर का धनपटारा करता है अथिा धनपटारा करने में अिप्रेररत करता है अथिा ककसी स्िीकृत सांस्था के ककसी पदासीन प्राधधकारी को अथिा प्राधधकृत अधधकारी को सौंपने , कब्जा लेने, हटाने अथिा इस अधधधनयम में धिधहत अधभप्राय हते ु ऐसे शरीर का उपयोग करने में बाधा डालता है तो उसे, दोष धसधद्व पर, 5 सौ रूपये तक के अथगदडां से दधां डत ककया जायेगा। 7. लािाररस शरीर का कब्जा प्राप्त करने में सहायता करने हते ु पुधलस एिां अन्य अधधकाररयों का कर्त्गव्य - पुधलस और लोक स्िास्थ्य धिभागों के समस्त अधधकारी और ककसी स्थानीय सांस्था की सेिा में समस्त अधधकारी और समस्त ग्राम अधधकारी ककसी लािाररस शरीर का कब्जा प्राप्त करने में इस अधधधनयम के अन्तगगत ककसी प्राधधकारी अथिा प्राधधकृत अधधकारी की सहायता करने के धलए, सभी युधक्तयुक्त कदम उठाएांगे। 8. इस अधधधनयम के अन्तगगत कायग करने िाले व्यधक्तयों का बचाि- इस अधधधनयम के अन्तगगत ककसी सद्भािना पूिगक ककये गये कायग अथिा करने के अधभप्राय हते ु ककसी व्यधक्त पर कोई िाद, अधभयोजन अथिा अन्य िैधाधनक कायगिाही नहीं चलेगी। 9. अधधकारी लोक सेिक होंगे- इस अधधधनयम के अन्तगगत कायग करने हते ु धनयुधक्त अथिा प्राधधकृत समस्त अधधकारी , भारतीय दण्ड सांधहता , 1860 (1860 का क्रमाांक 45) की धारा 21 के अथो में लोक सेिक माने जािेंगे। 3 10. धनयम (1) राज्य शासन , अधधसूचना द्वारा इस अधधधनयम के अधभप्रायों को कायगरूप दने े हते ु धनयम बना सकेगा। (2) धिधशष्ट और पूिगगामी शधक्त की व्यापकता पर प्रधतकूल प्रभाि डाले धबना ऐसे धनयमों में धनम्न प्रािधान हो सकेगा। (अ) अिधध धजसमें ककसी मृत व्यधक्त के शरीर का दािा ककया जा सकेगा ; और (आ) मृत शरीरों की सुरिा । धनयम अन्तगगत मध्य प्रदशे ऐनेटामी (चीर-फाड़) अधधधनयम , 1954 अधधसूचना क्रमाांक 5580/1593/सर्त्रह /धचककत्सा / चार कदनाांक 24 कदसभबर ,1966 1. यह धनयम मध्य प्रदशे ऐनेटामी धनयम , 1966 कहलायेंगे। 2. इन धनयमों में, जब तक सांदभग से अन्यथा अपेधित न हो- (अ) “अधधधनयम ” से तात्पयग है मध्य प्रदशे ऐनेटामी अधधधनयम , 1954 (आ) “लािाररस मृत शरीर ” से तात्पयग है ककसी मृत व्यधक्त का शरीर धजसके धलए उसके धनकट सभबधन्धयों में से ककसी के द्वारा अथिा उसकी जाधत, समुदाय और धमग के ककसी व्यधक्त द्वारा उसकी मृत्यु के 72 घन्टे के अन्दर कोई दािा न ककया जाये। 3. (1) पुधलस , आयुर्विज्ञान और लोक स्िास्थ्य धिभाग का प्रत्येक अधधकारी और कमगचारी और ककसी स्थानीय प्राधधकरण की सेिा में प्रत्येक अधधकारी और कमगचारी और प्रत्येक ग्राम अधधकारी और कमगचारी धजसे ककसी ऐसे व्यधक्त की ककसी िेत्र में ककसी सािगजधनक स्थान पर मृत्यु की जानकारी धमलती है धजससे उसका कोई स्थायी धनिास -स्थान नहीं है, तो िह इस तथ्य की ररपोटग न्यूनतम व्यािहाररक धिलभब करके धनकटतम पुधलस थाने के पदासीन अधधकारी को दगे ा। (2) उपधनयम (1) के अन्तगगत ररपोटग की प्राधप्त पर पुधलस थाने का पदासीन अधधकारी , मृत शरीर को सड़ने से सुरधित करने हते ु धचककत्सालय में पहुच ां ाने की व्यिस्था करेगा और तथ्य की ररपोटग प्राधधकारी को दगे ा। (3) उपधनयम (2) में ककसी बात को होते हुए भी उस ग्राम के पटेल अथिा सरपांच का, धजसमें अथिा धजसके समीप मृत शरीर पाया जाये, यह कर्त्गव्य होगा कक िह मृत शरीर को सड़ने से सुरधित 4 करने हते ु धनकटतम धचककत्सालय में पहुच ाने की व्यिस्था करे और इस तथ्य की ररपोटग धनकटतम पुधलस थाने के पदासीन अधधकारी को भी द।े (4) मृत शरीर को धचककत्सालय में पहुच ाने में आये खचग का धबल धचककत्सालय के पदासीन अधधकारी को भेजा जायेगा जो उसका भुगतान करेगा। उक्त अधधकारी , मृत शरीर को उसके सांरिण में धचककत्सालय लाये जाने और उसे सुरधित रखने की सूचना प्राधधकृत अधधकारी को भी दगे ा। 4. (1) जहाँ कोई व्यधक्त ककसी धचककत्सालय में अथिा बांदीगृह में मृत हो जाता है तो ऐसे धचककत्सालय अथिा बांदीगृह का पदासीन अधधकारी परन्तु इस तथ्य की सूचना रोगी अथिा बन्दी के ररकाडग में उधललधखत उसके धनकटतम सांबांधी को दगे ा। यकद उक्त सांबांधी 72 घन्टे के अन्दर शरीर के धलए दािा नहीं करता तो मृत शरीर को धारा 5 में दी गई रीधत में धनपटा कदया जायेगा। (2) उपधनयम (1) के पालन में, ककसी दािे की प्राधप्त तक, यकद कोई हो, मृत शरीर को सड़ने से सुरधित करने हते ु धचककत्सालय में अथिा आयुर्विज्ञान में प्रधशिण सांस्था में जैसी भी धस्थधत हो, पहुच ा कदया जायेगा। (3) यकद उपधनयम (1) में धिधहत अिधध में ऐसे शरीर के धलए दािा नहीं ककया जाता तो प्राधधकारी अधधकारी अधधधनयम की धारा 5 में दी गई रीधत में शरीर का धनपटारा करने हते ु अग्रसर होगा। (4) यकद स्िीकृत सांस्थाओं में से ककसी को चीड़-फाड़ परीिण और धिश्लेनषण हते ु मृत शरीर की आिश्यकता न हो तो सभबधन्धत प्राधधकृत अधधकारी उसे िैधाधनक दािेदार को सौंप दगे ा अथिा यकद कोई ऐसा दािा प्रस्तुत नहीं ककया जाता तो िह मृत शरीर का अधि सांस्कार अथिा दफनाने द्वारा धनपटारा कर दगे ा, जैसी भी धस्थधत हो। 5. ऐसा व्यधक्त जो अपने मृत शरीर को चीर-फाड़ प्रधशिण और धिश्लेधोषण हते ु समर्वपत करने की इच्छा रखता हो, अपनी इच्छा की सूचना धलधखत में सभबधन्धत धजले के प्राधधकृत अधधकारी को दगे ा ।प्राधधकृत अधधकारी ऐसे समस्त समपगणों का ररकाडग इन धनयमों से सांलि प्रारूप में रखेगा। 6. (1) ककसी मृत शरीर के धिषय में ककसी सांशय अथिा धििाद से सांबांधधत धारा 3 के अन्तगगत कोई मामला उस धारा के अन्तगगत धनयुक्त अधधकारी को, धलधखत में आिेदन द्वारा सौंपा जायेगा और उक्त अधधकारी को व्यधक्तगत रूप में कदया जायेगा। (2) उप-धनयम (1) के अन्तगगत ककसी आिेदन की प्राधप्त पर, धारा 3 के अन्तगगत धनयुक्त अधधकारी , ऐसे अग्रेषण की प्राधप्त से दो कदन के अन्दर का कदनाांक सुनिाई हते ु तुरन्त धनयत करेगा और तदनुसार पिकारों को सूधचत कर दगे ा। 5 (3) सांबांधधत पिकारों की सुनिाई के पश्चाोोत,् राज्य शासन द्वारा अधधधनयम की धारा 3 के अन्तगगत धनयुक्त अधधकारी , ऐसी अधतररक्त जाँच कर सकेगा , जो िह मामले के धनपटारे हते ु उधचत समझे और अपना धनणगय सुनिाई के कदनाांक को दगे ा और उसका धनणगय अधन्तम एिां धनणागयक रहगे ा। 7. प्राधधकृत अधधकारी लािाररस मृत शरीरों को सुरधित रखने हते ु बफग अथिा मुदागघरों में रखिाने की व्यिस्था करेगा ताकक उन्हें सड़ने से बचाया जा सके , जब तक कक— (अ) धारा 3 के अन्तगगत धनणगय न कर कदया जाये; (आ) उसे उसके ककसी सांबांधी , धमत्र अथिा सेिक को सौंप न कदया जाय; अथिा (इ) उसे ककसी आयुर्विज्ञान सांस्था को चीर फाड़ परीिण अथिा धिश्लेमषण हते ु सौंप न कदया जाय। 8. इन धनयमों में की कोई बात ऐसे मामले में लागू नहीं होगी जहाँ मृत्यु शांकाप्रद पररधस्थधतयों में हुई हो और शरीर धचककत्सीय -धिधधक परीिण हते ु अपेधित हो। ऐसे मामले में यकद पुधलस ने स्ियां शरीर का कब्जा न धलया हो तो शरीर पुधलस को सौंप कदया जायेगा। 9. मध्य भारत पैथोलाजी एिां एनेटामी धनयम , 1956 और मध्य प्रदशे राज्य के ककसी िेत्र में इन धनयमों के प्रारभभ के तुरन्त पूिग प्रिृर्त् इन धनयमों के समकि अन्य कोई धनयम , एतद् द्वारा धनरधसत ककये जाते हैं: परन्तु प्रािधान यह है कक इस प्रकार धनरधसत धनयमों के अन्तगगत की गई कोई बात अथिा ककया गया कोई कायग, जब तक कक िह बात अथिा कायग इन धनयमों के ककसी प्रािधान के प्रधतकूल न हो, इन धनयमों के अन्तगगत की गई अथिा ककया गया माना जायेगा। 6 प्रारूप (धनयम 5 दधे खये) ऐसे व्यधक्तयों का रधजस्टर जो अपने मृत शरीर को चीर–फाड़ परीिण और धिश्लेरषण के अधभप्रायों से अर्वपत करने की इच्छा रखते हैं धजला............................... क्रमाांक व्यधक्त का नाम और पता जो आिेदन की स्िीकृत सांस्था का मृत शरीर रटप्पधणयाँ अपने मृत शरीर को चीर- प्राधप्त का नाम धजसे मृत सौंपने का फाड़ धिश्ल.े षण और कदनाांक शरीर भेजा जायेगा कदनाांक परीिण के अधभप्राय हते ु अपगण करने की इच्छा रखता है (1) (2) (3) (4) (5) (6) 7
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